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राम मंदिर पर सात दिनों में कभी भी आ सकता है फैसला, प्रशासन की हालात पर है पैनी नजर

 अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाले अगले सात कार्यदिवसों के भीतर आ सकता है। कारण कि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल के बस सात कार्यदिवस ही शेष हैं। इस साफ अर्थ है कि मामले की सुनवाई कर रही पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ इन्हीं दिनों में फैसला सुना सकती है।

बता दें कि फैसले से पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सुरक्षा-व्यवस्था पुख्ता करने जोर दिया है। पूरे राज्य में धारा-144 लागू है। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए अलग-अलग जिलों में मंदिरों और मस्जिदों से धार्मिक संगठन और कमेटियां अमन-शांति की अपील भी कर रही हैं। मेरठ में भी रविवार को करीब छह मस्जिदों से शांति बनाए रखने का ऐलान किया गया। 
 
दारूल उलूम देवबंद उलेमा की आइमा संस्था ने भी लोगों से अपील की है। भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने पदाधिकारियों को संयम बरतने और टिप्पणी से बचने को कहा है। वहीं सोमवार को यूपी के सभी जिलों के खुफिया और अन्य अफसरों की लखनऊ में बैठक हुई।

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